चिलचिलाती धूप के बीच हजारों जायरीन तपते फर्श पर चलने को मजबूर नजर आए, जबकि दरगाह परिसर और आसपास के क्षेत्रों में जेबकतरों ने भी जमकर किया हाथ साफ,,,

चिलचिलाती धूप के बीच हजारों जायरीन तपते फर्श पर चलने को मजबूर नजर आए, जबकि दरगाह परिसर और आसपास के क्षेत्रों में जेबकतरों ने भी जमकर किया हाथ साफ,,,

चिलचिलाती धूप के बीच हजारों जायरीन तपते फर्श पर चलने को मजबूर नजर आए, जबकि दरगाह परिसर और आसपास के क्षेत्रों में जेबकतरों ने भी जमकर किया हाथ साफ,,,
पिरान कलियर:
आस्था की नगरी पिरान कलियर में महीने की पहली नौचंदी जुमेरात पर उमड़ी जायरीनों की भारी भीड़ ने दरगाह प्रबंधन और पुलिस प्रशासन की व्यवस्थाओं की हकीकत उजागर कर दी। चिलचिलाती धूप के बीच हजारों जायरीन तपते फर्श पर चलने को मजबूर नजर आए, जबकि दरगाह परिसर और आसपास के क्षेत्रों में जेबकतरों ने भी जमकर हाथ साफ किया। कई जायरीन अपने पर्स, मोबाइल फोन और अन्य कीमती सामान चोरी होने के बाद पुलिस से गुहार लगाते दिखाई दिए।
नौचंदी जुमेरात के अवसर पर दरगाह क्षेत्र में वाहनों की बेतरतीब पार्किंग के कारण जगह-जगह जाम की स्थिति बनी रही। जाम से जूझते जायरीन घंटों पसीना बहाते रहे। वहीं, कई श्रद्धालु चोरी की घटनाओं से मायूस होकर बिना किसी शिकायत के ही वापस लौट गए। दरगाह परिसर में ठंडे पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था न होने से भी जायरीन इधर-उधर भटकते दिखाई दिए।
गौरतलब है कि महीने की पहली जुमेरात को नौचंदी जुमेरात के रूप में मनाया जाता है, जिस दौरान श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना बढ़ जाती है। जायरीनों की सुविधा को लेकर दरगाह प्रबंधन भले ही बड़े-बड़े दावे करता हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल विपरीत नजर आती है। करोड़ों रुपये की वार्षिक आय और विभिन्न ठेकों से होने वाली कमाई के बावजूद श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाओं के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है।
हैरानी की बात यह है कि दरगाह से चंद कदमों की दूरी पर कलियर कोतवाली स्थित होने के बावजूद प्रत्येक जुमेरात और विशेष रूप से नौचंदी जुमेरात पर बड़ी संख्या में जायरीन जेबकतरों का शिकार होकर मायूस लौटने को मजबूर हो जाते हैं। आरोप है कि अधिकांश मामलों में केवल खानापूर्ति के तौर पर तहरीर लेकर कार्रवाई की औपचारिकता पूरी कर दी जाती है, जबकि पीड़ितों को राहत नहीं मिल पाती।
इसके अलावा, झुंड बनाकर घूमने वाले मनचलों और हुड़दंगियों की गतिविधियां भी जायरीनों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि भीड़ वाले दिनों में सुरक्षा और सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए जाएं तो श्रद्धालुओं को इस तरह की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

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