हुसैन सबके हैं: यौम-ए-आशूरा पर दस दिवसीय नियाज़-ए-हुसैन लंगर सेवा का हुआ समापन,,,
रुड़की।
माह-ए-मुहर्रमुल हराम की 10 तारीख़ (यौम-ए-आशूरा) के अवसर पर अंजुमन ग़ुलामान-ए-अहल-ए-बैत (अ.स.) सोसाइटी, रुड़की द्वारा आयोजित “हुसैन सबके हैं” थीम पर आधारित दस दिवसीय नियाज़-ए-हुसैन लंगर सेवा अभियान का समापन बड़े अदब व अकीदत के साथ किया गया।
यौम-ए-आशूरा इस्लामी तारीख़ का वह दिन है, जब 61 हिजरी में कर्बला की सरज़मीन पर हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.), उनके अहल-ए-बैत और वफ़ादार साथियों ने दीन-ए-इस्लाम, इंसानियत, इंसाफ़ और हक़ की ख़ातिर अपनी जानों की अज़ीम कुर्बानी पेश की। इमाम हुसैन (अ.स.) ने ज़ुल्म के सामने सर झुकाने के बजाय शहादत को चुना और पूरी दुनिया को यह पैग़ाम दिया कि हक़ की राह में चाहे कितनी भी मुश्किलें आएँ, उससे पीछे नहीं हटना चाहिए।
अंजुमन ग़ुलामान-ए-अहल-ए-बैत (अ.स.) सोसाइटी, रुड़की द्वारा 1 मुहर्रम से लगातार प्रतिदिन नियाज़-ए-हुसैन का आयोजन किया जा रहा था। दस दिनों तक बिना किसी रुकावट के राहगीरों, ज़रूरतमंदों एवं आम लोगों के लिए वेजिटेरियन लंगर तक़सीम किया गया, जिसमें छोले-चावल, राजमा-चावल, कढ़ी-चावल, कबुली चने-चावल, दाल मख़नी-चावल तथा अन्य विभिन्न व्यंजनों की नियाज़ पेश की गई। आज 10 मुहर्रम (यौम-ए-आशूरा) के अवसर पर इस दस दिवसीय सेवा अभियान का समापन किया गया।
वही इसी मोके पर मंगलौर के बस अड्डे पर भी शिया समुदाय ने मातम कर हसन हुसैन को याद किया

