भूपतवाला की रानीगली स्थित करीब 100 वर्ष पुराने अमेरिकन आश्रम/स्वामी देवानंद ट्रस्ट की संपत्ति को लेकर लगाया आरोप ,,,
पार्षद सुनीता शर्मा ने जिलाधिकारी हरिद्वार मयूर दीक्षित और एसएसपी हरिद्वार को शिकायत देकर आश्रम की संपत्ति पर कथित कब्जे, जमीन के कथित हस्तांतरण और व्यावसायिक इस्तेमाल की उच्चस्तरीय जांच की मांग,,,
हरिद्वार।
सनातन और धार्मिक आस्था के नाम पर करोड़ों की बेशकीमती जमीन पर कथित कब्जे का मामला अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। भूपतवाला की रानीगली स्थित करीब 100 वर्ष पुराने अमेरिकन आश्रम/स्वामी देवानंद ट्रस्ट की संपत्ति को लेकर आरोप है कि करीब तीन बीघा जमीन को कथित तौर पर खुर्द-बुर्द कर निजी हितों के लिए इस्तेमाल किया गया। सवाल सीधा है—धार्मिक ट्रस्ट की इतनी बेशकीमती संपत्ति पर कथित कब्जे का खेल किसके इशारे पर चला और यदि आरोप सही हैं तो भूमाफिया को संरक्षण देने वाले कौन हैं? क्या सनातन की आड़ में धार्मिक संपत्तियों पर कब्जे का यह खेल यूं ही चलता रहेगा? अब मामला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दरबार में पहुंचाने की तैयारी है।
मामले में नगर निगम हरिद्वार के वार्ड संख्या-2 भूपतवाला की पार्षद सुनीता शर्मा ने जिलाधिकारी हरिद्वार मयूर दीक्षित और एसएसपी हरिद्वार को शिकायत देकर आश्रम की संपत्ति पर कथित कब्जे, जमीन के कथित हस्तांतरण और व्यावसायिक इस्तेमाल की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। शिकायत में धार्मिक ट्रस्ट की संपत्ति को कथित तौर पर खुर्द-बुर्द कर निजी हित में इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगाया गया है।
करोड़ों की संपत्ति पर किसका खेल….
शिकायत के मुताबिक रानीगली स्थित अमेरिकन आश्रम/स्वामी देवानंद ट्रस्ट की संपत्ति का संबंध लंबे समय से धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों से रहा है। आरोप है कि संपत्ति के कुछ हिस्से पर कथित रूप से कब्जा कर निजी इस्तेमाल किया जा रहा है। करीब तीन बीघा जमीन को खुर्द-बुर्द किए जाने और उसके कुछ हिस्से की कथित बिक्री को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
यहां सबसे बड़ा सवाल जमीन की कीमत से कहीं आगे जाकर रजिस्ट्री और हस्तांतरण की वैधानिकता का है। यदि जमीन ट्रस्ट की संपत्ति है तो उसका हस्तांतरण किन परिस्थितियों में हुआ? किसके अधिकार से हुआ? इसके लिए कौन-कौन से दस्तावेज इस्तेमाल किए गए? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
भंडारे और धर्मशाला की जगह दुकान-रेस्टोरेंट?….
शिकायत में कहा गया है कि आश्रम की जमीन पर पूर्व में भंडारा, निशुल्क दवा वितरण और धर्मशाला जैसी धार्मिक-सामाजिक गतिविधियां संचालित होती थीं। आरोप है कि समय के साथ संपत्ति के स्वरूप में बदलाव कर वहां दुकानों, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को जगह दी गई।
अब सवाल यह भी है कि जिस भूमि का इस्तेमाल धार्मिक-सामाजिक उद्देश्य के लिए होता रहा, वहां व्यावसायिक गतिविधियां किस अनुमति और किस भू-उपयोग के तहत संचालित की जा रही हैं? इस पहलू की भी जांच की मांग की गई है।
रजिस्ट्री से बैंक खातों तक जांच की मांग…..
पार्षद की शिकायत में संपत्ति से जुड़े सभी कागजात, रजिस्ट्री, ट्रस्ट रिकॉर्ड, लेनदेन और संबंधित बैंक खातों की जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही संपत्ति और आर्थिक लेनदेन का फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग रखी गई है, ताकि यह सामने आ सके कि संपत्ति से जुड़े किसी लेनदेन में किन लोगों की भूमिका रही।
यानी जांच केवल जमीन पर खड़े निर्माण तक सीमित नहीं रखने की मांग है, बल्कि उस पूरे कथित लेनदेन की पड़ताल की मांग है, जिसके जरिए जमीन के स्वरूप या स्वामित्व में बदलाव हुआ हो सकता है।
कांवड़ मार्ग प्रभावित होने का भी आरोप……
शिकायत में आश्रम की संपत्ति के आसपास कथित कब्जे और निर्माण से कांवड़ मार्ग प्रभावित होने का आरोप भी लगाया गया है। पार्षद ने प्रशासन और पुलिस से मौके का निरीक्षण कर भूमि एवं निर्माण की वास्तविक स्थिति का सत्यापन कराने की मांग की है। यदि कोई निर्माण या कब्जा नियमविरुद्ध पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।
मुख्यमंत्री के दरबार में छह सूत्रीय मांग…..
अब पार्षद सुनीता शर्मा इस मामले को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के समक्ष ले जाने की तैयारी में हैं। मुख्यमंत्री के सामने मुख्य रूप से छह मांगें रखी जाएंगी—
पहली, मामले की उच्चस्तरीय अथवा SIT जांच कराई जाए।
दूसरी, यदि जमीन की बिक्री या हस्तांतरण अवैध पाया जाता है तो उसे निरस्त कराने की कार्रवाई हो और संपत्ति को संरक्षण में लिया जाए।
तीसरी, जांच में दोषी पाए जाने वाले ट्रस्ट पदाधिकारियों अथवा अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए।
चौथी, संपत्ति पर किसी भी नियमविरुद्ध निर्माण की जांच कर तत्काल कार्रवाई की जाए।
पांचवीं, संपत्ति के कागजात, रजिस्ट्री और बैंक खातों का फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए।
छठी, जांच पूरी होने तक संपत्ति पर बिक्री, हस्तांतरण, निर्माण अथवा स्वरूप परिवर्तन रोककर यथास्थिति कायम रखी जाए।
आरोप सही या गलत, जांच से खुलेगा राज…..
फिलहाल जमीन पर कथित कब्जे, बिक्री और हस्तांतरण से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। स्वयं उपलब्ध रिपोर्ट में भी यह स्पष्ट किया गया है कि रजिस्ट्री की वैधता, जमीन के हस्तांतरण की परिस्थितियां और व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति जैसे सवाल जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे।
लेकिन सवाल गंभीर हैं। यदि संपत्ति वास्तव में धार्मिक ट्रस्ट की है और उसके साथ नियमविरुद्ध छेड़छाड़ हुई है तो जिम्मेदार कौन है? यदि जमीन की बिक्री वैध है तो उसके दस्तावेज सार्वजनिक जांच में क्यों नहीं आते? और यदि कब्जे के आरोप बेबुनियाद हैं तो जांच के जरिए दूध का दूध और पानी का पानी क्यों न किया जाए?
अब नजर मुख्यमंत्री के दरबार और प्रशासनिक जांच पर है। जांच से ही तय होगा कि अमेरिकन आश्रम की बेशकीमती संपत्ति को लेकर उठे आरोप महज विवाद हैं या फिर धार्मिक संपत्ति के संरक्षण के नाम पर एक बड़ा खेल चल रहा है।

