दरगाह परिसर के आसपास कुछ युवकों ने बेखौफ अंदाज में पटाखे छोड़ते हुए माहौल को दहशतनाक बनाया,,,

दरगाह परिसर के आसपास कुछ युवकों ने बेखौफ अंदाज में पटाखे छोड़ते हुए माहौल को दहशतनाक बनाया,,,

दरगाह परिसर के आसपास कुछ युवकों ने बेखौफ अंदाज में पटाखे छोड़ते हुए माहौल को दहशतनाक बनाया,,,
रुड़की।
पिरान कलियर स्थित दरगाह हजरत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक एक बार फिर अव्यवस्था और लापरवाही के घेरे में है। दरगाह के पैताने क्षेत्र में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा खतरनाक आतिशबाजी किए जाने का मामला सामने आया है, जिसमें एक रॉकेट पटाखा वुजू कर रहे जायरीन के बेहद करीब फट गया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद अकीदतमंदों में गहरा आक्रोश है।
मिली जानकारी के अनुसार, दरगाह परिसर के आसपास कुछ युवकों ने बेखौफ अंदाज में पटाखे छोड़ते हुए माहौल को दहशतनाक बना दिया। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक जायरीन वुजूखाने में इबादत की तैयारी में लगा हुआ है, तभी अचानक एक रॉकेट उसकी ओर आता है और पास में ही फट जाता है।
इस अप्रत्याशित धमाके से मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि कोई हादसा नही हुआ, लेकिन यह घटना किसी बड़े हादसे की गंभीर आशंका को जरूर उजागर करती है।
चौंकाने वाली बात यह रही कि इस खतरनाक हरकत के बाद भी संबंधित लोग न तो भयभीत दिखे और न ही पछतावे के कोई संकेत नजर आए, बल्कि वे इसे मनोरंजन की तरह लेते हुए हंसते दिखाई दिए। विशेषज्ञों की मानें तो इस तरह की हरकतें न केवल कानूनन अपराध हैं, बल्कि सार्वजनिक और धार्मिक स्थलों की गरिमा के भी खिलाफ हैं। अगर यह रॉकेट दरगाह के मुख्य परिसर में जाकर फटता, तो बड़ी संख्या में मौजूद महिलाओं, बच्चों और जायरीनों की जान जोखिम में पड़ सकती थी।
यह घटना दरगाह की सुरक्षा व्यवस्था पर सीधे तौर पर सवाल खड़े करती है। प्रशासन के अधीन होने के बावजूद अगर ऐसे संवेदनशील स्थल पर इस तरह की गतिविधियां हो रही हैं, तो यह लापरवाही नहीं बल्कि व्यवस्था की विफलता कही जाएगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दरगाह परिसर में पहले भी कई बार मारपीट और हुड़दंग की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई के अभाव में ऐसे तत्वों के हौसले बुलंद हैं।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन इस वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर आरोपियों तक पहुंचेगा और सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी बाकी घटनाओं की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

उत्तराखंड