दरगाह के कमरों के आवंटन पर उठे गंभीर सवाल,,,
सक्षम अधिकारियों की स्वीकृति के बिना कमरे आवंटित करने का आरोप, तत्कालीन प्रबंधक व सुपरवाइजर की भूमिका पर भी सवाल,,,
रुड़की/कलियर
अनवर राणा।
दरगाह कार्यालय से जुड़े कमरों के आवंटन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार, कमरे के आवंटन एवं किराया जमा कराने की प्रक्रिया को लेकर सक्षम अधिकारियों की स्वीकृति और आदेशों के अनुपालन पर सवाल उठाए गए हैं।
दस्तावेज में तत्कालीन दरगाह प्रबंधक एवं संबंधित सुपरवाइजर की भूमिका का भी उल्लेख सामने आता है। सवाल यह है कि यदि कमरे के आवंटन के लिए जॉइंट मजिस्ट्रेट रुड़की तथा सीईओ, उत्तराखंड वक्फ बोर्ड जैसे सक्षम अधिकारियों की स्वीकृति आवश्यक थी, तो तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कमरे की रसीद किस आधार पर काटी गई और संबंधित व्यक्ति को कमरे पर कब्जा कैसे दिया गया?
मामले में यह भी चर्चा है कि दरगाह कार्यालय के जिम्मेदार कर्मचारियों ने नियमों का पालन कराने के बजाय स्वयं ही कमरे के आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि बिना सक्षम स्वीकृति के कमरा आवंटित करने और किराया वसूलने की अनुमति किसने दी?
उपलब्ध दस्तावेज में वर्ष 2019 में उप जिलाधिकारी रुड़की को भेजी गई रिपोर्ट में कमरे के किराये तथा बकाया धनराशि का भी उल्लेख किया गया है। इससे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग और तेज हो गई है।
अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी मामले की जांच कर कमरे के आवंटन, रसीद काटने और कब्जा दिए जाने की प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ था या नहीं, इसकी जिम्मेदारी तय करते हैं या नहीं।
बड़ा सवाल: जब सक्षम अधिकारी की स्वीकृति जरूरी थी, तो बिना स्वीकृति के कमरे की रसीद आखिर किस अधिकार से काटी गई?

