कुल शरीफ की रस्म अदा होने के बाद शाम को असर की नमाज के बाद दस्तारबंदी की रस्म के बाद ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रुड़की एवं मेला अधिकारी दीपक रामचंद्र सेठ की ओर से भी मजार शरीफ पर पेश किये गये चादर और फूल,,,
कलियर।
हजरत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक के 758वें सालाना उर्स में गुरुवार को सुबह दस बजे कुल शरीफ की रस्म अदा होने के बाद शाम को असर की नमाज के बाद दस्तारबंदी की रस्म अदा की गई। इस दौरान ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रुड़की एवं मेला अधिकारी दीपक रामचंद्र सेठ की ओर से भी मजार शरीफ पर चादर और फूल पेश किए गए।
चादरपोशी के बाद सज्जादानशीन शाह अली एजाज साबरी ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं मेला अधिकारी दीपक रामचंद्र सेठ की दस्तारबंदी कर दुआ कराई। इस दौरान दरगाह परिसर में मौजूद अकीदतमंदों ने अदब और एहतराम के साथ रस्म में शिरकत की। दस्तारबंदी के दौरान दरगाह परिसर का माहौल पूरी तरह रूहानी नजर आया।सालाना उर्स में कुल शरीफ के बाद होने वाली दस्तारबंदी की रस्म का विशेष महत्व माना जाता है। वर्ष में एक बार होने वाली इस रस्म में देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे साबरी सिलसिले के पीर, फकीर और सूफियों की सज्जादानशीन शाह अली एजाज साबरी की ओर से दस्तारबंदी की जाती है। इस दौरान मजार शरीफ पर अकीदतमंदों ने हाजिरी देकर अमन, खुशहाली और मुल्क की तरक्की की दुआ मांगी।इस दौरान शाह यावर मियां साबरी,शाह खालिक मियां,सज्जादानशीन प्रतिनिधि शाह सुहेल मिया,यासिर एजाज साबरी, शाह गाज़ी,मुहिद खान,अदनान हबीब,अदील हबीब,नोमी मिया, सफीक साबरी,मुनव्वर अली,सलीम उदयपुरी,असद साबरी,सूफी राशिद साबरी,राव सिकन्दर हुसैन,अमीर साबरी, रहीम साबरी,नियाज़ी मिया,उबेद साबरी,शाहरुख साबरी आदि मौजूद रहे।

