माधोपुर हजरतपुर में पंचायत बैठक बनी आरोपों का अखाड़ा,ग्राम प्रधान पर घोटालों के गंभीर आरोप,,,
रुड़की।
रूड़की के माधोपुर हजरतपुर गाँव में ग्राम पंचायत बैठक में ग्राम प्रधान पर लगे घोटालों को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। जाँच प्रक्रिया से असंतुष्ट ग्रामीणों ने न सिर्फ सवाल उठाए बल्कि ब्लॉक अधिकारियों से सांठगांठ के भी गंभीर आरोप लगाए हैं। माधोपुर हजरतपुर गाँव में आयोजित ग्राम पंचायत की खुली बैठक उस समय हंगामे का रूप ले बैठी जब ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान द्वारा किए गए कथित घोटालों की जाँच प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए। ग्रामीणों का कहना है कि जाँच के नाम पर सिर्फ कागज़ों पर साइन कराए जा रहे हैं जबकि ज़मीनी हकीकत की कोई पड़ताल नहीं की जा रही।
ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि जिस प्रक्रिया के तहत साइन कराए जा रहे हैं उससे कोई भी ग्रामीण संतुष्ट नहीं है। आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया ग्राम प्रधान को बचाने के लिए रची गई साजिश है। ग्रामीणों का कहना है कि जाँच ज़मीन पर होनी चाहिए कागज़ों में नहीं। ग्राम प्रधान ने बड़ा घोटाला किया है और अब मिलीभगत कर खुद को बचा रहा है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि ग्राम प्रधान ने अपने कार्यकाल में विकास कार्यों में भारी अनियमितताएँ की हैं और अब ब्लॉक स्तर के अधिकारियों से सांठगांठ कर खुद को क्लीन चिट दिलाने की कोशिश कर रहा है। बैठक में मौजूद अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया लेकिन ग्रामीण निष्पक्ष और पारदर्शी जाँच की माँग पर अड़े रहे। इस दौरान मौके पर पुलिस भी मौजूद रही और कुछ ग्रामीणों द्वारा हंगामे की स्थिति उत्पन्न करने पर पुलिस को भी सख्ती दिखानी पड़ी। बीडीओ सुमन कोटियाल का कहना है कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बैठक का आयोजन किया गया। जाँच प्रक्रिया नियमानुसार चल रही है। वही ग्राम प्रधान प्रतिदिन है अपने ऊपर लगे सभी आरोपी को निराधार बताया और कहा की खुली बैठक में कोरम पूरा होने पर जनता के कार्य कराए जाते हैं। उनके ऊपर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या ग्राम प्रधान पर लगे गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जाँच होगी या फिर यह मामला कागज़ों में ही दबकर रह जाएगा। फिलहाल ग्रामीणों का गुस्सा साफ तौर पर प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनता नज़र आ रहा है।

