प्रदेश के तेज तर्रार पुलिस अधिकारियों में शुमार किए जाने वाले वर्ष 2006 बैज के आईपीएस अरुण मोहन जोशी ने देश के सबसे कम उम्र के आईजी बनने की उपलब्धि की हासिल,,,

प्रदेश के तेज तर्रार पुलिस अधिकारियों में शुमार किए जाने वाले वर्ष 2006 बैज के आईपीएस अरुण मोहन जोशी ने देश के सबसे कम उम्र के आईजी बनने की उपलब्धि की हासिल,,,

प्रदेश के तेज तर्रार पुलिस अधिकारियों में शुमार किए जाने वाले वर्ष 2006 बैज के आईपीएस अरुण मोहन जोशी ने देश के सबसे कम उम्र के आईजी बनने की उपलब्धि की हासिल,,,

हरिद्वार:

प्रदेश के तेज तर्रार पुलिस अधिकारियों में शुमार किए जाने वाले वर्ष 2006 बैज के आईपीएस अरुण मोहन जोशी ने देश के सबसे कम उम्र के आईजी बनने की उपलब्धि हासिल की है। महज 23 साल की उम्र में आईपीएस बनने वाले अरुण मोहन जोशी के आईजी बनने पर डीपीसी की मुहर लगी थी। जो एक जनवरी 2024 से लागू हो गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनके कंधों पर आईजी का बैच पहनाते हुए उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। अरुण मोहन जोशी ने हरिद्वार में पुलिस कप्तान रहते अपनी कार्यशैली से न सिर्फ आमजन के मन में छाप छोड़ी, बल्कि अपराधियों की नाक में नकेल डालने के लिए भी उन्हें याद किया जाता है। हरिद्वार में बात चाहे अवैध खनन की हो या फिर संगठित रूप से अपराध करने वाले बदमाशों को ठिकाने लगाने की, अरुण मोहन जोशी ने अपना लोहा मनवाया है। इसी तरह डीआईजी बनने तक वह देहरादून के एसएसपी रहे हैं। उनके कार्यकाल में अपराध पर प्रभावी अंकुश लगा और राजधानी की यातायात व्यवस्था में भी उनके समय आमूलचूल बदलाव हुआ। जिसे आज भी राजधानी के लोग याद करते हैं। वे अब देश के सबसे कम उम्र के आईजी बन गए हैं। प्रदेश भर से उन्हें इस उपलब्धि पर शुभकामनाएं मिल रही हैं।

 

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पहले आईपीएस बनकर बनाया रिकॉर्ड

उत्तराखण्ड के चकराता (देहरादून) निवासी आईपीएस अरुण मोहन जोशी 2006 में सबसे कम उम्र 23 साल में आईपीएस बने थे।हालांकि उनके बाद देश में अन्य अफसर कम उम्र में आईपीएस बनने का रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करा चुके हैं। लेकिन आईजी के मामले में 2004 बैच के आईपीएस गौरव राजपूत 2022 में 41 साल की उम्र में देश के सबसे कम उम्र के आईजी बने थे। लेकिन अब उत्तराखण्ड कैडर के 2006 बैच के आईपीएस अरुण मोहन जोशी 40 साल की उम्र में आईजी बने हैं। यानी अब आईपीएस अरुण मोहन जोशी देश के सबसे कम उम्र के आईजी बन गए हैं।

 

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हरिद्वार व रुड़की से रहा है विशेष नाता

 

आईजी अरुण मोहन जोशी की पढ़ाई देहरादून और हरिद्वार में हुई। बचपन में माता के निधन के बाद अफसर पिता ने उनकी परिवरिश की। यहां मिले संस्कार और शिक्षा को वह आज भी आत्मसात किए हुए हैं। आईपीएस जोशी के तीन भाई और एक बहन है। आईपीएस बनने से पहले वह आईआईटी रुड़की में इंजीनियर की पढ़ाई कर रहे थे। यूपीएससी की परीक्षा में वह पहले प्रयास में ही सफल हुए और आईपीएस कैडर मिला।

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राजीव स्वरूप व स्वीटी अग्रवाल भी पदोन्नत

पिछले माह 22 दिसम्बर को उत्तराखंड सचिवालय में मुख्य सचिव उत्तराखंड शासन की अध्यक्षता में भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों की डीपीसी सम्पन्न हुई।डीपीसी में वर्ष 2006 बैच के आईपीएस अधिकारी पुलिस उप महानिरीक्षक स्वीटी अग्रवाल,  अरुण मोहन जोशी, अनंत शंकर ताकवाले तथा राजीव स्वरूप को 01 जनवरी 2024 से पुलिस महानिरीक्षक पद पर पदोन्नति प्रदान करने का निर्णय लिया गया। स्वीटी अग्रवाल के प्रतिनियुक्ति पर होने के कारण उन्हें परफॉर्मा पदोन्नति प्रदान करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा वर्ष 2010 बैच के आईपीएस अधिकारी पुलिस अधीक्षक सुखबीर सिंह को दिनांक 01 जनवरी 2024 से पुलिस उप महानिरीक्षक पद पर पदोन्नति प्रदान करने का निर्णय लिया गया। जबकि वर्ष 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार तथा धीरेंद्र गुंज्याल को दिनांक 01 जनवरी 2024 से सेलेक्शन ग्रेड प्रदान करने का निर्णय लिया गया।

हरिद्वार: प्रदेश के तेज तर्रार पुलिस अधिकारियों में शुमार किए जाने वाले वर्ष 2006 बैज के आईपीएस अरुण मोहन जोशी ने देश के सबसे कम उम्र के आईजी बनने की उपलब्धि हासिल की है। महज 23 साल की उम्र में आईपीएस बनने वाले अरुण मोहन जोशी के आईजी बनने पर डीपीसी की मुहर लगी थी। जो एक जनवरी 2024 से लागू हो गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनके कंधों पर आईजी का बैच पहनाते हुए उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। अरुण मोहन जोशी ने हरिद्वार में पुलिस कप्तान रहते अपनी कार्यशैली से न सिर्फ आमजन के मन में छाप छोड़ी, बल्कि अपराधियों की नाक में नकेल डालने के लिए भी उन्हें याद किया जाता है। हरिद्वार में बात चाहे अवैध खनन की हो या फिर संगठित रूप से अपराध करने वाले बदमाशों को ठिकाने लगाने की, अरुण मोहन जोशी ने अपना लोहा मनवाया है। इसी तरह डीआईजी बनने तक वह देहरादून के एसएसपी रहे हैं। उनके कार्यकाल में अपराध पर प्रभावी अंकुश लगा और राजधानी की यातायात व्यवस्था में भी उनके समय आमूलचूल बदलाव हुआ। जिसे आज भी राजधानी के लोग याद करते हैं। वे अब देश के सबसे कम उम्र के आईजी बन गए हैं। प्रदेश भर से उन्हें इस उपलब्धि पर शुभकामनाएं मिल रही हैं।

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पहले आईपीएस बनकर बनाया रिकॉर्ड
उत्तराखण्ड के चकराता (देहरादून) निवासी आईपीएस अरुण मोहन जोशी 2006 में सबसे कम उम्र 23 साल में आईपीएस बने थे।हालांकि उनके बाद देश में अन्य अफसर कम उम्र में आईपीएस बनने का रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करा चुके हैं। लेकिन आईजी के मामले में 2004 बैच के आईपीएस गौरव राजपूत 2022 में 41 साल की उम्र में देश के सबसे कम उम्र के आईजी बने थे। लेकिन अब उत्तराखण्ड कैडर के 2006 बैच के आईपीएस अरुण मोहन जोशी 40 साल की उम्र में आईजी बने हैं। यानी अब आईपीएस अरुण मोहन जोशी देश के सबसे कम उम्र के आईजी बन गए हैं।

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हरिद्वार व रुड़की से रहा है विशेष नाता

आईजी अरुण मोहन जोशी की पढ़ाई देहरादून और हरिद्वार में हुई। बचपन में माता के निधन के बाद अफसर पिता ने उनकी परिवरिश की। यहां मिले संस्कार और शिक्षा को वह आज भी आत्मसात किए हुए हैं। आईपीएस जोशी के तीन भाई और एक बहन है। आईपीएस बनने से पहले वह आईआईटी रुड़की में इंजीनियर की पढ़ाई कर रहे थे। यूपीएससी की परीक्षा में वह पहले प्रयास में ही सफल हुए और आईपीएस कैडर मिला।
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राजीव स्वरूप व स्वीटी अग्रवाल भी पदोन्नत
पिछले माह 22 दिसम्बर को उत्तराखंड सचिवालय में मुख्य सचिव उत्तराखंड शासन की अध्यक्षता में भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों की डीपीसी सम्पन्न हुई।डीपीसी में वर्ष 2006 बैच के आईपीएस अधिकारी पुलिस उप महानिरीक्षक स्वीटी अग्रवाल, अरुण मोहन जोशी, अनंत शंकर ताकवाले तथा राजीव स्वरूप को 01 जनवरी 2024 से पुलिस महानिरीक्षक पद पर पदोन्नति प्रदान करने का निर्णय लिया गया। स्वीटी अग्रवाल के प्रतिनियुक्ति पर होने के कारण उन्हें परफॉर्मा पदोन्नति प्रदान करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा वर्ष 2010 बैच के आईपीएस अधिकारी पुलिस अधीक्षक सुखबीर सिंह को दिनांक 01 जनवरी 2024 से पुलिस उप महानिरीक्षक पद पर पदोन्नति प्रदान करने का निर्णय लिया गया। जबकि वर्ष 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार तथा धीरेंद्र गुंज्याल को दिनांक 01 जनवरी 2024 से सेलेक्शन ग्रेड प्रदान करने का निर्णय लिया गया।

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