शब-ए-बरात की रात में तौबा अस्तगफार करें और अपने दिलों से नफरत कीना, हसद व बुगज को निकाल एक दूसरे को माफ करके ज्यादा से ज्यादा अल्लाह की करें इबादत,,,

शब-ए-बरात की रात में तौबा अस्तगफार करें और अपने दिलों से नफरत कीना, हसद व बुगज को निकाल एक दूसरे को माफ करके ज्यादा से ज्यादा अल्लाह की करें इबादत,,,

शब-ए-बरात की रात में तौबा अस्तगफार करें और अपने दिलों से नफरत कीना, हसद व बुगज को निकाल एक दूसरे को माफ करके ज्यादा से ज्यादा अल्लाह की करें इबादत,,,
रुड़की।
अनवर राणा।
हजरत मौलाना अरशद कासमी तथा कारी मोहम्मद हारुन कासमी ने आज शब-ए-बरात के मौके पर कहा कि शाबानुल मुअज्जम के महीने की 15-वीं रात को शब-ए-बारात कहा जाता है। पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्ल०ने फरमाया कि शाहबानो शाहरी व रमजानो शाहरुल्लाह यानी कि शाबान मेरा महीना है और रमजान अल्लाह का महीना है। इस महीने में एक रात आती है, जिसको शब-ए-बरात कहते हैं, यानी जहन्नुम से छुटकारा पाने की रात।उन्होंने बताया कि हदीसे पाक के अंदर आता है कि अल्लाह ताला सातवें आसमान से आसमाने दुनिया पर आकर आवाज देते हैं कि कोई मगफिरत का चाहने वाला कि उसकी मगफिरत कर दी जाए, है कोई परेशानियों का सताया हुआ कि उसकी परेशानी दूर कर दी जाए, है कोई ऐसा बीमार कि उसको शिफा अता कर दी जाए और हदीसे पाक के अंदर आता है कि अल्लाह के रसूल ने इरशाद फरमाया कि अल्लाह ताला इस रात में कबीला ए क्लब की बकरियों के बालों के बराबर अपने बंदों की मगफिरत फरमाते हैं, लेकिन चार आदमी ऐसे है जो रात में मगफिरत से महरूम रह जाते हैं। पहला मुशरिक,दूसरे दिल में किना,हसद और बुगज रखने वाला, तीसरा नशा करने वाला और चौथा मां-बाप की नाफरमानी करने वाला यह चार आदमी, जिनकी इस मुबारक रात में बख्शीश नहीं हो पाती अगर किसी के अंदर यह बुराइयां पाई जाती हों, तो इन तमाम बुराइयों से इस रात में तौबा अस्तगफार करें और अपने दिलों से नफरत कीना, हसद व बुगज को निकाल एक दूसरे को माफ करके ज्यादा से ज्यादा अल्लाह की इबादत करें और कुरान शरीफ की तिलावत करें तथा सलातुल तस्बीह की नमाजज पढ़े और हो सके तो साबान की 15 तारीख का रोजा रखें क्योंकि इस रोजे का सवाब एक साल के रोजे के बराबर मिलता है। उन्होंने कहा कि इस रात में इबादत करें। आतिशबाजी जैसी बुराइयों से दूर रहकर घर में ही अल्लाह को राजी करें और अपने गुनाहों से तौबा करते हुए अल्लाह से माफी मांगे।

उत्तराखंड