नसबंदी के बावजूद महिला के गर्भवती हो जाने और उसके बाद इलाज में गंभीर लापरवाही के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने अपनाया कड़ा रुख,,,

नसबंदी के बावजूद महिला के गर्भवती हो जाने और उसके बाद इलाज में गंभीर लापरवाही के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने अपनाया कड़ा रुख,,,

नसबंदी के बावजूद महिला के गर्भवती हो जाने और उसके बाद इलाज में गंभीर लापरवाही के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने अपनाया कड़ा रुख,,,
हरिद्वार:
नसबंदी के बावजूद महिला के गर्भवती हो जाने और उसके बाद इलाज में गंभीर लापरवाही के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने ज्वालापुर स्थित लीला गुप्ता नर्सिंग होम की चिकित्सक डा. बरखा चंद्र और प्रेम नर्सिंग होम की चिकित्सक डा. संध्या शर्मा को दोषी ठहराते हुए महिला को हुई मानसिक क्षति के लिए 1.20 लाख रुपये और 15 हजार रुपये वाद खर्च, कुल राशि पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिए हैं।
———
अधिवक्ता के माध्यम से दर्ज कराई गई थी शिकायत
ज्वालापुर के डाट मंडी निवासी विशाल भारद्वाज ने अपनी पत्नी दीपा के इलाज में लापरवाही को लेकर अपने अधिवक्ता अमित भारद्वाज के माध्यम से वर्ष 2018 में जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में लीला गुप्ता नर्सिंग होम, प्रेम नर्सिंग होम सहित अन्य संबंधित पक्षों को नामजद किया गया था।
———–
नसबंदी के बाद भी ठहरा गर्भ

शिकायतकर्ता के अनुसार उनकी पत्नी दीपा का नसबंदी ऑपरेशन प्रेम नर्सिंग होम में डा. संध्या शर्मा के यहां कराया गया था। इसके बावजूद दीपा गर्भवती हो गई। जब दोबारा चिकित्सक को दिखाया गया तो उसे तीन माह की गर्भवती बताया गया और तत्काल गर्भपात कराने की सलाह दी गई। इसके बाद दीपा को लीला गुप्ता नर्सिंग होम ले जाया गया, जहां डा. बरखा चंद्र ने भी स्थिति को गंभीर बताते हुए तुरंत गर्भ गिराने की आवश्यकता बताई।
————
दवाइयों की अधिक मात्रा, बिगड़ी हालत

आरोप है कि 25 फरवरी 2018 को लीला गुप्ता नर्सिंग होम में भर्ती करने के बाद गर्भपात के लिए अधिक मात्रा में दवाइयां दे दी गईं। इसके चलते दीपा की हालत बिगड़ गई और उसे अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा।
————
बिना सहमति ऑपरेशन, ब्लड ग्रुप में भी चूक
शिकायत में कहा गया कि गंभीर हालत के दौरान परिजनों की सहमति के बिना ऑपरेशन कर दिया गया। इलाज के दौरान ए प्लस ब्लड मंगवाया गया, जबकि बाद में ब्लड बैंक से जानकारी मिली कि मरीज का ब्लड ग्रुप ओ प्लस है।
————–
एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक भटकाया
आरोप है कि दीपा को बिना सहमति के योग माता पायलट बाबा अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत में सुधार न होने पर उसे जॉलीग्रांट अस्पताल रेफर कर दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम में महिला को जान का गंभीर खतरा उठाना पड़ा और परिवार को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा।
————
आयोग ने माना चिकित्सकीय लापरवाही
मामले की सुनवाई के बाद आयोग अध्यक्ष गगन कुमार गुप्ता, सदस्य डा. अमरेश रावत और रंजना गोयल ने साक्ष्यों के आधार पर माना कि नसबंदी के बावजूद गर्भ ठहरने और उसके बाद उपचार में गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही हुई। आयोग ने दोनों चिकित्सकों को दोषी ठहराते हुए पीड़ित महिला को क्षतिपूर्ति देने के आदेश जारी किए।

उत्तराखंड