तीन दिवसीय “रुड़की वाटर कॉन्क्लेव 2026” का सफलतापूर्वक हुआ समापन, जल प्रबंधन, अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में नए विचारों और संभावनाओं को भी किया प्रोत्साहित,,,

तीन दिवसीय “रुड़की वाटर कॉन्क्लेव 2026” का सफलतापूर्वक हुआ समापन, जल प्रबंधन, अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में नए विचारों और संभावनाओं को भी किया प्रोत्साहित,,,

तीन दिवसीय “रुड़की वाटर कॉन्क्लेव 2026” का सफलतापूर्वक हुआ समापन, जल प्रबंधन, अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में नए विचारों और संभावनाओं को भी किया प्रोत्साहित,,,
रुड़की।
अनवर राणा
राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की एवं भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय “रुड़की वाटर कॉन्क्लेव 2026” का समापन समारोह दिनांक 25 फरवरी 2026 को आईआईटी रुड़की में आयोजित किया गया। यह तीन दिवसीय कॉन्क्लेव जल सहयोग, जल प्रबंधन और सतत विकास के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर सार्थक चर्चा और ज्ञान-विनिमय का एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुआ। समापन समारोह का आरंभ कॉन्क्लेव के संयोजक प्रो. आशीष पांडेय के संबोधन से हुआ। उन्होंने विगत तीन दिनों में आयोजित विभिन्न तकनीकी सत्रों, की-नोट व्याख्यानों, विशेष सत्रों तथा समानांतर सत्रों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इस कॉन्क्लेव में देश एवं विदेश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं एवं प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए जल प्रबंधन, जल गुणवत्ता, सीमा पार जल सहयोग, सतत सिंचाई तथा जल संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार एवं शोध प्रस्तुत किए। उन्होंने इस कॉन्क्लेव की सफलता के लिए सभी प्रतिभागियों, वक्ताओं, प्रायोजकों एवं आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया।
इसके पश्चात आईआईटी रुड़की के कार्यवाहक निदेशक प्रो. आर. डी. गर्ग ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय कॉन्क्लेव वैज्ञानिक अनुसंधान और व्यावहारिक समाधान के बीच समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि जल संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन और भविष्य की चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए इस प्रकार के मंच अत्यंत आवश्यक हैं।
इसके बाद राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की के कार्यवाहक निदेशक ए. आर. सेंथिल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कॉन्क्लेव विभिन्न संस्थानों और विशेषज्ञों के बीच सहयोग को मजबूत करने का एक उत्कृष्ट अवसर प्रदान करता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस कॉन्क्लेव में हुई चर्चाएँ और निष्कर्ष भविष्य में जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
समारोह में जर्मनी से पधारी विशिष्ट अतिथि प्रो. निकोला फोहरर ने अपने संबोधन में इस कॉन्क्लेव के सफल आयोजन की सराहना की और कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस प्रकार के ज्ञान-साझा मंच जल सहयोग को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने जल प्रबंधन के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर कॉन्क्लेव के दौरान आयोजित ओरल एवं पोस्टर प्रस्तुतियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार युवा शोधकर्ताओं और प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. वी. पी. सिंह ने अपने संबोधन में कॉन्क्लेव के सफल आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई दी। उन्होंने जल संसाधनों के सतत और प्रभावी प्रबंधन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि जल संरक्षण और सहयोग के क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान, नीतिगत समर्थन और सामुदायिक सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रतिभागियों को इस कॉन्क्लेव से प्राप्त ज्ञान और अनुभव का उपयोग समाज और राष्ट्र के हित में करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का संचालन प्रो. कृतिका कोठारी द्वारा किया गया। अंत में राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की के वैज्ञानिक डॉ. राजेश सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों, प्रायोजकों तथा आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया और उनके सहयोग से इस कॉन्क्लेव के सफल आयोजन के लिए धन्यवाद दिया।
समापन समारोह के साथ ही तीन दिवसीय “रुड़की वाटर कॉन्क्लेव 2026” का सफलतापूर्वक समापन हुआ, जिसने जल प्रबंधन, अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में नए विचारों और संभावनाओं को प्रोत्साहित किया।

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