*”एक जंगल और लाखो मोर/ सारे चो……?*  उर्स में चारो ओर से धन बटोरने की नीति पर चल रहा  दरगाह दफ्तर,,,

*”एक जंगल और लाखो मोर/ सारे चो……?* उर्स में चारो ओर से धन बटोरने की नीति पर चल रहा दरगाह दफ्तर,,,

*”एक जंगल और लाखो मोर/ सारे चो……?*

उर्स में चारो ओर से धन बटोरने की नीति पर चल रहा दरगाह दफ्तर,,,

*”अनवर राणा:-रुड़की!*

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*”लूट मची है चारो ओर.. सारे चोर,, एक जंगल और लाखों मोर,, सारे चोर….?* मशहूर शायर राहत इंदौरी की गज़ल की ये लाइनें इन दिनों आस्था की नगरी पिरान कलियर में सटीक साबित हो रही है। दूध की रखवाली बिल्ली के सुपुर्द किए जाने का मामला यहां खूब चर्चाओं का विषय बना हुआ है। चारो ओर से धन बटोरने की नीति पर चल रहे महोदय यह तक भूल गए कि इन दिनों व्यवस्था और जवाबदेही का जिम्मा भी उन्ही के सर है।
दरअसल जिला अधिकारी हरिद्वार /दरगाह प्रशासक द्वारा काफी समय पूर्व दरगाह साबिर पाक के प्रबंधक की जिम्मेदारी तहसीलदार रुड़की को जॉइंट मजिस्ट्रेट रुड़की की मार्फ़त सौप दी थी। अब दरगाह साबिर पाक का 758 वे उर्स की तैयारी व प्रबंध व्यवस्था भी दरगाह प्रबंधक/तहसीलदार ही देख रहे है। समय रहते जिला अधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर उर्स की तैयारियों को लेकर विभिन प्रकार के ठेके भी दे समय रहते दिये गये थे। लेकिन आज उर्स की 6 तारीख होने के बावजूद अस्थाई लेट्रिन ठेकेदार के द्वारा रुड़की रोड़ पीएनबी बैंक की बगल में दर्जनों अस्थाई लेट्रीनो को जमा कर रखा गया जिसका उर्स की एक तारिक से बिल दरगाह के दान के पैसे से किया जाना नहीं तो कोई पानी का ओर लाइट का इंतजाम इन लेट्रीनो मे किया जाता जबकि ठेके की शर्तों में कम्प्लीट होता है। अब सवाल यह उठ रहा है कि इस से भी उर्स में लगी लेट्रीनो कि गिनती उर्स के बाद करने पर इस खेल में लाखों का गोरखधंधा इसलिये उजागर हो चुका था कि मौके पर कम ओर बिल बाउचर में दर्जनों से अधिक दर्शा कर दरगाह के दान के पैसे की बंदरबांट का मामला उजागर हुआ था जिसको लेकर तत्कालीन जॉइंट मजिस्ट्रेट ने उक्त ठेकेदार का बिल भुगतान पर रोक लगाई थी। इस बार भी इस तरफ के गोरखधंधे की सूत्रों से जानकारी मिल ठेकेदार ने जिन अस्थाई लेट्रीनो को शोपीस बनाकर बिना पानी लाइट के खड़ा कर दिया है उनको कहाँ यूज किया जाएगा यह कोई जानकारी नहीं। जनता के द्वारा दरगाह को दान किये गये धन की बंदरबांट करना यहां का फैशन बना हुआ है। यही कारण है कि उर्स के 6 दिन बीतने पर भी दर्जनों अस्थाई लेट्रिन अधिकारियों की नाक के नीचे एक जगह ही खड़ी कर उर्स की शोभा बढ़ा रही है ओर बिल बाउचर सब का बनना तय है क्योंकि दरगाह दफ्तर भ्र्ष्टाचार का अड्डा पूर्व से ही बना चला आ रहा है।अब देखना यह है कि महोदय दान के पैसे बंदरबांट पर कंट्रोल कर पाते है या नहीं।

उत्तराखंड