माननीय उच्च न्यायालय ने महिला एवं बाल विकास विभाग की सीडीपीओ वर्षा शर्मा के स्थानांतरण पर लगाई अंतरिम रोक ,,,
रुड़की।
कार्यस्थल पर उत्पीड़न के मामले में पीड़िता की गुहार पर संज्ञान लेते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने महिला एवं बाल विकास विभाग की सीडीपीओ वर्षा शर्मा के स्थानांतरण पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायालय ने बिना विधिवत जांच के किए गए स्थानांतरण को गंभीर मानते हुए विभाग से जवाब तलब किया है। साथ ही आरोपी अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के आदेश भी दिए गए हैं।
उच्च न्यायालय के आदेश के बाद मंगलवार को सीडीपीओ वर्षा शर्मा ने पुनः रुड़की स्थित संबंधित कार्यालय में योगदान किया। इस अवसर पर परियोजना क्षेत्र की सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने उनका अभूतपूर्व स्वागत किया। ढोल-ताशों की गूंज के बीच फूलों की वर्षा की गई और मालाएं पहनाकर उनका अभिनंदन किया गया।
कार्यालय भवन परिसर में रिबन कटवाकर सम्मानपूर्वक प्रवेश कराया गया। स्वागत कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। तालियों की गड़गड़ाहट और आत्मीय वातावरण के बीच सीडीपीओ वर्षा शर्मा के समर्थन में एकजुटता का संदेश दिया गया।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास है और वे सत्य एवं न्याय के साथ खड़ी हैं। कार्यक्रम स्थल पर महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़ी अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहीं, जिन्होंने सीडीपीओ के साथ हुए व्यवहार को अनुचित बताते हुए न्यायालय के फैसले का स्वागत किया।
सीडीपीओ वर्षा शर्मा ने सभी का आभार जताते हुए कहा कि वह अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और पारदर्शिता के साथ करती रहेंगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विभागीय योजनाओं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के हित में कार्य लगातार जारी रहेगा।

