श्रीमद्भागवत कथा न केवल धार्मिक आस्था का उत्सव बनी बल्कि विकसित भारत 2047 के संकल्प के साथ समाज को जागरूक करने वाला एक सशक्त संदेश,,,

श्रीमद्भागवत कथा न केवल धार्मिक आस्था का उत्सव बनी बल्कि विकसित भारत 2047 के संकल्प के साथ समाज को जागरूक करने वाला एक सशक्त संदेश,,,

श्रीमद्भागवत कथा न केवल धार्मिक आस्था का उत्सव बनी बल्कि विकसित भारत 2047 के संकल्प के साथ समाज को जागरूक करने वाला एक सशक्त संदेश,,,
रूड़की।
रुड़की में आज आध्यात्म,भक्ति और समाजसेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला जब हरिमिलाप धर्मशाला साकेत कॉलोनी में एक दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य एवं दिव्य आयोजन किया गया। श्रद्धा,आस्था और संस्कारों से ओत-प्रोत इस धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े और पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस पावन अवसर पर प्रयागराज से पधारीं गृहस्थ साध्वी कंचन जी (ग्वालिन) ने अपने मधुर, सरल और भावपूर्ण वचनों से श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराया। कथा के दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, भक्ति, सेवा, सदाचार और मानव जीवन में धर्म के महत्व का अत्यंत प्रभावशाली वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रहकर “एक भारत श्रेष्ठ भारत विकसित भारत 2047” के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाना रहा। कथा मंच से यह संदेश दिया गया कि आध्यात्मिक चेतना के साथ समाजसेवा और नैतिक मूल्यों को अपनाकर ही सशक्त और विकसित भारत का निर्माण संभव है। कार्यक्रम की विशेष और सराहनीय झलक समापन अवसर पर देखने को मिली, जब समाजसेवा की भावना को साकार रूप देते हुए कूपन के माध्यम से चयनित एक बहन को साइकिल एवं 2100 रुपये नकद प्रदान कर सम्मानित किया गया। वहीं तीन अन्य बहनों को भी 500-500 रुपये नकद व फूल मालाओं से सम्मानित किया गया। इस पहल ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि धर्म तभी पूर्ण है जब वह समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहयोग पहुंचाए। पूरे आयोजन की अध्यक्षता बी.के. यादव ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे आयोजन समाज को सही दिशा देने के साथ-साथ युवाओं को संस्कारवान बनाने का कार्य करते हैं।कार्यक्रम के दौरान भजन-कीर्तन,जयकारों और श्रद्धालुओं की भक्ति से हरिमिलाप धर्मशाला का पूरा परिसर कृष्णमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने आयोजन की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए इसे भक्ति, संस्कार और समाजसेवा का प्रेरणास्रोत बताया।कुल मिलाकर रुड़की में आयोजित यह श्रीमद्भागवत कथा न केवल धार्मिक आस्था का उत्सव बनी बल्कि विकसित भारत 2047 के संकल्प के साथ समाज को जागरूक करने वाला एक सशक्त संदेश भी दे गई।

उत्तराखंड