वर्षों से गृह जनपद में तैनाती को लेकर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश वाली खंडपीठ ने सरकार से तीन सप्ताह में मांगा जवाब,,,

वर्षों से गृह जनपद में तैनाती को लेकर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश वाली खंडपीठ ने सरकार से तीन सप्ताह में मांगा जवाब,,,

वर्षों से गृह जनपद में तैनाती को लेकर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश वाली खंडपीठ ने सरकार से तीन सप्ताह में मांगा जवाब,,,

नूपुर वर्मा ने नगर आयुक्त,नगर निगम रुड़की कार्यकाल में निगम को राजनीति का अखाड़ा बनाते हुए किए थे कार्य चर्चा जोरों पर,,,

रुड़की।

अनवर राणा।

प्रशासनिक अधिकारी नूपुर वर्मा के अपने गृह जनपद में तैनाती से संबंधित याचिका पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई हुई सुनवाई मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायधीश विपिन सांघी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार से इस संबंध में जवाब मांगा है।नूपुर वर्मा के गृह जनपद संबंधी दस्तावेजों के संबंध में तीन सप्ताह में नोटिस इशू कर जवाब मांगा गया है। याचिकाकर्ता खंजरपुर के पूर्व प्रधान अजय कुमार द्वारा हाई कोर्ट को यह अवगत कराया गया कि नूपुर वर्मा द्वारा अपनी सिटी रुड़की में नौकरी के दौरान भारी भ्रष्टाचार किया गया एवं पिछड़ी जाति व महिला आरक्षण का लाभ वर्ष-2014 में रुड़की के डोमोसाइल पर लेते हुए बाद में अपना गृह जनपद सरकार को गुमराह करते हुए उत्तर प्रदेश में परिवर्तित करा लिया।उत्तराखंड राज्य ऑडिट विभाग द्वारा वर्ष 2020-21 व 2021-22 की ऑडिट रिपोर्ट में रुड़की में भारी भ्रष्टाचार संज्ञान में आया है।नूपुर वर्मा ने नगर आयुक्त,नगर निगम रुड़की कार्यकाल में निगम को राजनीति का अखाड़ा बनाते हुए कार्य किया।इस बीच उनके द्वारा तमाम वित्तीय अनियमितताएं की गई।कई।सलेमपुर के तालाब की मिट्टी बिकवाने में उनकी मुख्य भूमिका रही।इस संबंध में हरिद्वार जिलाधिकारी को शिकायत की गई,जिसकी जांच भी हुई।नूपुर वर्मा पिछले पांच सालों से अपने ग्रह जनपद में तैनात हैं।पूर्व में भी दो वर्ष गृह जनपद में तैनात रह चुकी हैं।सरकार में अपने बड़े रसूख के चलते वह अपने गृह नगर में जनपद में रहने का लाभ ले रही हैं,अब हाई कोर्ट द्वारा इसका संज्ञान लिया गया है।जानकारी के लिए बता दें कि नूपुर वर्मा के द्वारा नगर आयुक्त रुड़की पद पर रहते हुए तमाम गड़बड़ियां की गई है,जिसकी शिकायत मुख्यमंत्री के पोर्टल पर हाल के दिनों में की गई है और प्रधानमंत्री कार्यालय को भी शिकायतें भेजी गई है।

उत्तराखंड